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शिक्षा और रोजगार को लेकर केंद्रीय बजट में हुईं बड़ी घोषणाएं, जानिए क्या कहा वित्त मंत्री ने

केंद्रीय बजट में शिक्षा और रोजगार को लेकर बड़ी घोषणाएं हुई हैं। मेक इन इंडिया के तहत 60 लाख नौकरियां देने और शिक्षा के लिए डिजिटल यूनिवर्सिटी बनाने की बात कही गई है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने आज संसद में केंद्रीय बजट (Union Budget) पेश करते हुए कई अहम घोषणाएं की हैं। इस दौरान उन्होंने शिक्षा और रोजगार को लेकर कई बड़े वादे किए। यहां हम आपको प्वाइंटर्स में उन घोषणाओं के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

डिजिटल यूनिवर्सिटी की घोषणा: डिजिटल एजुकेशन (Digital Education) को बढ़ावा देने के लिए  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई नए प्रोजेक्‍ट शुरू करने का ऐलान किया है। इसके लिए डिजिटल यूनिवर्सिटी बनाने की घोषणा की गई है। इस यूनिवर्सिटी में आईएसटीई स्‍टेंडर्ड के अनुसार विश्‍व स्‍तर की गुणवत्‍ता वाली शिक्षा मिलेगी।

वन क्‍लास वन टीवी चैनल की बढ़ी संख्या 

वन क्‍लास वन टीवी चैनल (One Class One TV Channel) को बढ़ाकर 200 टीवी चैनल करने की घोषणा हुई है। अभी त‍क केवल 12 टीवी चैनलों के माध्‍यम से बच्‍चे शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। इसका क्षेत्रीय भाषाओं में भी विस्तार किया जाएगा।

फिर से होंगे कौशल विकास कार्यक्रम शुरू 

बजट में कहा गया है कि कौशल विकास कार्यक्रमों को दोबारा शुरू किया जाएगा। राज्‍यों के आईटीआई कौशल विकास के द्वारा इन कोर्सेज को चलाया जाएगा और इसके लिए ई-पोर्टल लॉन्च होगा। कौशल विकास कार्यक्रमों को नए सिरे से शुरू किया जाएगा, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

नई 60 लाख नौकरियां

वित्त मंत्री ने बजट में रोजगार (Budget On Employment) को लेकर  कहा कि सरकार देश के युवाओं, महिलाओं और गरीबों को सशक्त बनाने पर ध्यान दे रही है। 60 लाख नौकरियां सृजित करना सरकार का अगला लक्ष्य है। बजट के मुताबिक, आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत 16 लाख नौकरियां दी जाएंगी और मेक इन इंडिया के तहत 60 लाख नौकरियां आएंगी।

5 टॉप शिक्षण संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा

बजट में पांच शीर्ष शिक्षण संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा मिलेगा और इन्हें 25 हजार करोड़ का विशेष फंड दिया जाएगा। इन संस्थानों के लिए फैकल्टी और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की देखरेख एआईसीटीई करेगा।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री मिलेगी सभी भारतीय भाषाओं में

बजट में कहा गया है कि टीवी, इंटरनेट, रेडियो और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिये सभी भारतीय भाषाओं में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इससे शिक्षकों को ई-कंटेंट मिल सकेगा।

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