परीक्षितगढ़ का इतिहास अब पहुंचेगा हर पर्यटक तक, ऐतिहासिक स्थलों पर लगाए जाएंगे विशेष होर्डिंग

मेरठ, निज प्रतिनिधि।ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखने वाले परीक्षितगढ़ को नई पर्यटन पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। अब नगर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर वहां के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विशेष होर्डिंग लगाए जाएंगे, ताकि यहां आने वाले पर्यटक परीक्षितगढ़ के गौरवशाली अतीत को विस्तार से जान सकें। इस अभियान की शुरुआत अखिल विद्या सेवा ट्रस्ट द्वारा की जा रही है।
परीक्षितगढ़ लंबे समय से महाभारत कालीन इतिहास और राजा परीक्षित से जुड़ी मान्यताओं के कारण चर्चाओं में रहा है। बावजूद इसके, नगर में आने वाले अधिकांश लोगों को यहां के ऐतिहासिक स्थलों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाती थी। अब नगर के पर्यटन स्थलों पर इतिहास आधारित होर्डिंग लगाए जाने से लोगों को यहां की सांस्कृतिक विरासत को समझने में आसानी होगी। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इससे परीक्षितगढ़ की पहचान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन नगरों में और मजबूत होगी।
पर्यटन स्थलों पर दिखेगा परीक्षितगढ़ का गौरवशाली इतिहास
अखिल विद्या सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष तथा नगर पंचायत परीक्षितगढ़ के स्वच्छ भारत मिशन ब्रांड एंबेसेडर विष्णु अवतार रुहेला ने बताया कि नगर के सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों पर वहां के इतिहास से संबंधित जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। उन्होंने कहा कि होर्डिंग्स के माध्यम से पर्यटकों को यह बताया जाएगा कि संबंधित स्थल का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व क्या है तथा उसका संबंध किस कालखंड से रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि नगर के मुख्य चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर परीक्षितगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों के चित्र भी लगाए जाएंगे। इससे बाहर से आने वाले लोगों को नगर की ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में जानकारी मिलेगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उनका कहना था कि परीक्षितगढ़ को पर्यटन नगरी बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।
नगर पंचायत ने पर्यटन विकास को बताया प्राथमिकता
नगर पंचायत चेयरमैन हिटलर त्यागी ने कहा कि परीक्षितगढ़ के पर्यटन विकास के लिए नगर पंचायत पूरी तरह से अखिल विद्या सेवा ट्रस्ट के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि नगर के विकास और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जाएंगी। उनका मानना है कि यदि स्थानीय इतिहास को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया जाए तो इससे नगर की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में भी सुधार आ सकता है।
दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में लोग धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा करते हैं। ऐसे में परीक्षितगढ़ को पर्यटन के मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने के लिए यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यहां मूलभूत सुविधाओं और प्रचार-प्रसार पर ध्यान दिया जाए तो यह नगर क्षेत्रीय पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की कोशिश
स्थानीय सामाजिक संगठनों का मानना है कि वर्तमान समय में युवाओं को अपने क्षेत्रीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की जानकारी सीमित रूप से ही मिल पाती है। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर ऐतिहासिक जानकारी प्रदर्शित करने से नई पीढ़ी अपने अतीत को बेहतर तरीके से समझ सकेगी। यह पहल केवल पर्यटन तक सीमित नहीं बल्कि सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने का माध्यम भी बन सकती है।
कार्यक्रम के दौरान पूर्व प्रधानाचार्य पदम सैन मित्तल, अंतर्राष्ट्रीय नारी परिषद की अध्यक्ष पूनम रुहेला, टीम तेजस्विनी की राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वाति चौधरी, पूर्व सैनिक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुनील कुमार त्यागी, नारी शक्ति परिषद की अध्यक्ष मोहिनी वर्मा, संतराम सैनी, मनोज शर्मा, सरताज, नंदकिशोर पप्पू, ओजस्विनी रुहेला और परीक्षिता कृतिका सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक पर्यटन को मिल सकती है नई दिशा
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हस्तिनापुर, मेरठ और परीक्षितगढ़ जैसे कई ऐतिहासिक नगर मौजूद हैं, लेकिन प्रचार-प्रसार की कमी के कारण इनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर सीमित रही है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थानीय इतिहास को आधुनिक माध्यमों और आकर्षक प्रस्तुति के जरिए लोगों तक पहुंचाया जाए तो सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिल सकती है।
परीक्षितगढ़ में शुरू किया गया यह अभियान आने वाले समय में अन्य नगरों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। इससे स्थानीय रोजगार, व्यापार और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
निष्कर्ष
परीक्षितगढ़ के पर्यटन स्थलों पर इतिहास आधारित होर्डिंग लगाने की पहल नगर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे पर्यटकों को यहां के ऐतिहासिक महत्व की सटीक जानकारी मिलेगी और स्थानीय लोगों में भी अपनी विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। यदि प्रशासन और सामाजिक संगठन इसी तरह मिलकर कार्य करते रहे तो आने वाले समय में परीक्षितगढ़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।



