मेरठ

मेरठ व्यापार मंडल ने खाद्य सुरक्षा कानून के खिलाफ मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, जानिए क्या हैं 12 मुख्य मांगें।

मेरठ, निज प्रतिनिधि। मेरठ में उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत व्यापारियों को आ रही व्यावहारिक और कानूनी अड़चनों के विरोध में बिगुल फूंक दिया है। व्यापारियों ने अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सहायक आयुक्त ग्रेड-2 (खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन) को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से व्यापारियों ने विभाग की सैंपलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग की है।

खाद्य सुरक्षा अधिनियम और सैंपलिंग प्रक्रिया में सुधार की मांग

उत्तर प्रदेश के प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र मेरठ में व्यापारियों ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जब भी किसी प्रतिष्ठान से नमूने लिए जाते हैं, तो रिटेलर के साथ निर्माता को भी पक्षकार बनाया जाता है, लेकिन कानूनी रूप से अनिवार्य ‘फॉर्म 5’ निर्माता को नहीं भेजा जाता। व्यापारियों की मांग है कि पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए निर्माता के पंजीकृत पते पर डाक द्वारा तत्काल सूचना भेजी जाए। इसके अलावा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के व्यापारियों ने यह मांग भी रखी है कि केवल बिल प्रस्तुत करने की स्थिति में ही निर्माता को जांच का हिस्सा बनाया जाए, ताकि बाजार में मौजूद नकली सामान के कारण निर्दोष व्यापारियों का उत्पीड़न न हो।

जांच रिपोर्ट में देरी और भ्रष्टाचार की बढ़ती आशंका

व्यापारियों ने विभागीय सुस्ती पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि अधिनियम के अनुसार 14 दिनों के भीतर नमूने की जांच रिपोर्ट आ जानी चाहिए, परंतु धरातल पर इसमें महीनों का समय लग रहा है। इस देरी के कारण खाद्य सामग्री की ‘एक्सपायरी डेट’ निकल जाती है, जिससे व्यापारियों के पास दोबारा जांच कराने का विकल्प ही नहीं बचता। व्यापारियों ने मांग की है कि राजकीय प्रयोगशाला से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद यदि नमूना फेल पाया जाता है, तो धारा 46(4) के तहत पुन: जांच हेतु पत्र तत्काल जारी करने के आदेश पारित किए जाएं। साथ ही, उन्होंने निजी प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट के आधार पर की जाने वाली दंडात्मक कार्रवाई को अवैध बताते हुए इसे तुरंत बंद करने की अपील की है।

व्यापारी हितों का संरक्षण और प्रशासनिक सुधार

मेरठ और आसपास के जिलों के व्यापारियों का कहना है कि जब तक केंद्रीय प्रयोगशाला की अंतिम रिपोर्ट न आ जाए, तब तक किसी भी खाद्य सामग्री को नष्ट या जब्त न किया जाए। विभाग में वर्तमान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे नमूना पास होने पर व्यापारी को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई की जा सके। ज्ञापन में यह भी सुझाव दिया गया कि छोटे विवादों के निपटारे के लिए अधिनियम की धारा 69 के तहत ‘शमन’ (Compounding) की व्यवस्था लागू की जाए। इसके अतिरिक्त, खेतों में कीटनाशकों के अनियंत्रित उपयोग को देखते हुए खाद्य पदार्थों के मानकों को नए सिरे से तय करने और पूर्णकालिक न्याय निर्धारण अधिकारियों की नियुक्ति की मांग भी उठाई गई है।

ज्ञापन सौंपने वाले प्रमुख व्यक्तित्व

इस महत्वपूर्ण विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन प्रक्रिया में मेरठ के कई गणमान्य व्यापारी शामिल रहे। ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में मुख्य रूप से राजकुमार त्यागी, इसरार सिद्दीकी, मनी बंसल, मेहुल, रियाज, अतुल त्यागी, आकाश, सुशील जैन, चांद, राजा, मौ0 आसिफ, सरफराज, नरेश कुमार, सुनील कुमार, साजिद, अतुल्य गुप्ता, राम अवतार बंसल, संजय सागर, वसीम, गौरव गोयल, राजू, आफताब, वासिम शामिल थे।

निष्कर्ष

मेरठ के व्यापारियों द्वारा उठाया गया यह कदम उत्तर प्रदेश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की संकल्पना को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। व्यापारियों की यह 12 सूत्रीय मांगें न केवल उनके हितों की रक्षा करती हैं, बल्कि खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार की भी वकालत करती हैं। यदि प्रशासन इन मांगों पर सकारात्मक विचार करता है, तो इससे न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी बल्कि व्यापारियों और सरकार के बीच विश्वास का नया सेतु भी स्थापित होगा।

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