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Idi Amin: युगांडा का तानाशाह ईदी अमीन दादा के जुल्मों ने लोगों में दहशत फैला दी थी, लाखों लोगों के कत्ल का इल्जाम भी लगा उस पर

दुनियाभर में युगांडा का तानाशाह ईदी अमीन दादा अपनी क्रूरता और सनकीपन से लोगों में दहशत फैला दी थी। उसने 1972 में ऐलान किया युगांडा में रहने वाले सभी एशियाई 90 दिनों के भीतर देश छोड़ दें। उन दिनों युगांडा में 90 हजार के करीब एशियाई मूल के लोग रहते थे।

दुनियाभर के इतिहास के पन्ने पलटे जाएं तो हमें कई तानाशाहों के बारे में पता चलेगा। ईदी अमीन का नाम भी इन सब में शामिल था जो अपनी क्रूरता और सनकीपन के लिए जाना गया। जब अमीन के बारे में किताबों में लिखा गया तो उन किस्सों ने सभी को दंग कर दिया।उन सारी बातों के बाद लोगों ने युगांडा के इस तानाशाह को अलग-अलग नाम दिए। इसके अलावा अपने ही देश के लाखों लोगों के कत्ल का इल्जाम भी उस पर लगा।

देश में तख्तापलट कर खुद को युगांडा का राष्ट्रपति घोषित कर देने वाले ईदी अमीन का जन्म कोबको में हुआ था। बचपन तंग गुजरा और मां ने ही पालन-पोषण किया। छोटी उम्र से उग्र स्वभाव वाला अमीन जब बड़ा हुआ तो मुक्केबाजी करने लगा और आगे चलकर हैवीवेट चैम्पियन बना।  फिर साल 1945-46 के आसपास वह सेना में शामिल हो गया और तेजतर्रार होने के कारण अधिकारियों की नजरों में चढ़ गया।

ईदी अमीन ने धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत की और सेना के उच्च पदों पर पहुंचा। साल 1962 में युगांडा में हुए एक नरसंहार का आरोप ईदी अमीन पर लगा लेकिन कार्रवाई होने से पहले ही युगांडा को आजादी मिल गई। इसके बाद तो अमीन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। युगांडा में पहली ओबेट मिल्टन की सरकार में खुद सेना का नेतृत्व किया लेकिन 1971 में उसने तख्तापलट कर खुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया।

सरकार हाथ में आते ही अमीन ने क्रूरता की सारी सीमाएं लांघ दी। इसके एक साल बाद ही उसने ऐलान किया कि सभी एशियाई 90 दिनों के भीतर देश छोड़ दें। अमीन के इस फैसलें ने सभी को हैरान कर दिया। एशियाई मूल के लोगों को लगा कि शायद अमीन ने ऐसे ही यह बात कही है लेकिन उसने सच में यह फैसला लिया था। उन दिनों युगांडा में 90 हजार के करीब एशियाई मूल के लोग रहते थे।

तानाशाह अमीन ने अपने फैसले के बारे कहा था कि एशियाई लोग देश का शोषण कर रहे हैं और अफ्रीकी मूल के लोगों से तालमेल नहीं रखते हैं। इस फैसले में कहा गया कि यह लोग केवल 55 पाउंड और 250 किलो तक सामान ही देश से बाहर ले जा सकते हैं। ईदी अमीन के बारे में लिखी किताब ‘अ स्टेट ऑफ ब्लड: द इनसाइड स्टोरी ऑफ ईदी अमीन’ में युगांडा के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री हेनरी केयेंबा ने बहुत कुछ लिखा।

हेनरी केयेंबा ने बताया कि अपने दुश्मनों को अमीन ने न केवल मारा बल्कि शवों के साथ भी बर्बरता की। इन शवों में शरीर के कई हिस्से जैसे गुर्दे, लिवर, होंठ, नाक और गुप्तांग गायब होते थे।  इसी किताब में उन्होंने इस बात का जिक्र भी किया कि अमीन ने साल 1975 में कई बार बैठकों में शेखी बघारते हुए कहा था कि उसने इंसानों का मांस खाया है। वहीं, अमीन के नौकर ने भी बाद में खुलासा किया था उसने घर के एक फ्रिज में कटा हुआ सिर देखा था।

अपने ही देश के लाखों लोगों के कत्ल का इल्जाम भी ईदी अमीन के ऊपर लगा। अमीन के शासनकाल के बाद युगांडा में कई जगहों पर ढेर सारी सामूहिक कब्रें पाई गईं। साल 1979 के बाद ईदी अमीन को देश छोड़कर भाग गया और सऊदी अरब में निर्वासन में रहने को मजबूर हुआ। फिर साल 2003 में दुनिया के सबसे खूंखार तानाशाह ईदी अमीन दादा की मौत हो गई।

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